Background

भानुदास काळे, जय अम्बे नगर, मानखुर्द – घाटकोपर लिंक रोड, चेंबूर

A) आपका पानी हक़ समिति से रिश्ता कैसे बना?

मै पहले से घर बचाओ घर बनाओ आंदोलन में मेधा ताई पाटकर के साथ इस आंदोलन में सक्रिय था। हमारे इस घर के समस्या के साथ ही हमें पानी के भी समस्या थी। पानी हक़ समिति भी घर बचाओ घर बनाओ आंदोलन के सहयोगी थे। मेधा ताई से मुझे पानी हक़ समिति मुम्बई में पानी के मुद्दे पर ईमानदारी, निस्वार्थपूर्ण से लढ़ रही है यह पता चला और मैं भी पानी हक़ समिति के इस जहा इंसान वहा पानी अभियान में जुड़ा और पानी हक़ समिति के हर आंदोलन मोर्चे में पूरी तरह से सक्रीय रहा इस पानी के आंदोलन में साथ रहते रहते पानी हक़ समिति के समन्वयक सीताराम शेलार,जगदीश पाटणकर,राजू वंजारे ये सभी साथी काफी अच्छे दोस्त बने और इस तरह से मेरा पानी हक़ समिति के साथ काफी अच्छा रिश्ता बना।

B)    आपने पानी हक़ समिति के काम मे क्या चुनौतियों का सामना किया है?

1)1995 के बाद के लोगों को पानी नहीं देने के इस मुम्बई महानगर पालिका के  जी.आर की वजह से काफी समस्या आयी।

2)पानी कंनेक्शन करने के लिए मैं 2015 से स्थानिक नगरसेवक के साथ मीटिंग करते आया हु। बस्ती के दक्षता समिति के अध्यक्ष को लेकर 2016-17 के बीच में सहायक अभियंता थोरात को पानी कंनेक्शन सन्दर्भ में  मिलने गये तो उन्होंने बुरी तरह से मुझसे बात की, और मुझे कहा कि पानी के ऊपर मुम्बई में 35 केस चल रही है तेरे पे 36 वी कैस करू क्या इस तरह से धमकाया भी गया।और पानी कंनेक्शन के लिए बी.एम. सी  से रिश्वत भी मांगी जाती।

3)2012 को पानी हक़ समिति से हमने बी.एम. सी के खिलाफ पानी सबको समानता पूर्वक मिलना चाहिए इस मुद्दे को रखकर जनहित याचिका दाखल की थी। और 2012 को सर्वोच्च न्यायालयने मुम्बई महानगर पालिका को आदेश दिया की सभी नागरिकों को समान पानी देना चाहिए। फिर भी मुम्बई महानगर पालिकाने ना हरकत प्रमाणपत्र की मांग रखकर पानी देंने को नकारा।

4)2018 में पानी कंनेक्शन के लिए अर्जी करके भी और पूरी तरह से बी.एम.सी में फॉलो उप लेके भी कोई भी कारन नहीं होते हुए आज मई महीने में पानी के पर्मिशन फॉर्म मिले है।

आपको इस अभियान में निरंतर सक्रिय रहने को क्या प्रेरणा देता है? या प्रेरणा कहाँसे मिलती है?

1)पहले से ही मैं सामाजिक संस्थाओं के साथ काम कर रहा हु, तो मुझे पता है की इस देश में बोहोत सी सामाजिक संस्था है जो लोगों को न्याय,अधिकार देने के लिए निशुल्क,ईमानदारी से काम कर रही है। 

2)पानी हक़ समिति भी इसी तरह लोगों को पानी का समान अधिकार देने के लिए ईमानदारी से निशुल्क लढ़ रही।और इस संन्घर्ष में हमने जित भी हासिल की है,बोहोत से बस्तियों में पानी कंनेक्शन भी हो रहा है।

हमें पता है कि हमारे अधिकारों के लिए एकजुट होके लड़ना है। पानी हक़ समिति का संन्घर्ष ही मेरे लिए प्रेरणा है और इसीलिये मैं पानी हक़ समिति में सक्रिय हु।

अजुमाबी मोहम्मद यासीन शेख (अजुमाखाला), रेलवे ट्रांजिट कैंप, मानखुर्द

पानी हक़ समिति से रिश्ता कैसे बना?

मैं 2008 से CORO महिला मंडल फेडरेशन से जुड़ी थी। यहाँ पे हमारा तिरंगा महिला मंडल एक गुट था। हम यहाँ मूलभूत सुविधाओं के लिए काम करते थे। वैसे तो हमे खुद पानी की बोहोत समस्या थी, हैम बोहोत दूर से पानी भरके लाते थे। एक दिन coro फेडरेशन में पानी के समस्या के ऊपर मीटिंग हुयीं।इस मीटिंग में सीताराम दादा ने हम सबको पानी के अधिकार के बारे में मार्गदर्शन किया और अगर पानी का अधिकार हासिल करना है तो लढना पड़ेगा ऐसे भी कहा। उस दिन बाद से फिर पानी के समस्या को लेकर मुम्बई के सभी कार्यकर्ताओं ने एक संघटन बनाया  और  पानी हक समिती का निर्माण हूवा। इस तरह से पानी हक समिती के साथ मेरा रिश्ता बना।

A) आपने पानी हक़ समिति के काम मे क्या चुनौतियों का सामना किया है?

बी.एम.सी से हमे रेलवे के जमीन पर रहने की वजह से,1995 के बाद के रहने की वजह से, डिक्लेर स्लम न होने की वजह से, पानी कनेक्शन के लिए नकारा गया। फिर हमने अपने संवैधानिक पानी के अधिकार की मांग के लिए राज्य मानव अधिकार में अर्जी की,राज्य सरकार को अर्जी की,बी.एम.सी में भी अर्जी की पर कुछ भी हासिल नही हुवा। सभी प्रयत्न निष्फल होने के बाद हमने 2012 को मुम्बई हायकोर्ट में जनहित याचिका दखिल की और 2 साल बाद 2014 में उसका निर्णय हुवा। जज साहब ने मुम्बई महानगरपालिका को सभी नागरिकों को समान पानी देने का आदेश दिया।पर उसके बाद भी महानगरपालिका ने लोगो को पानी देने के लिए निर्णय नही लिया। फिर 28 नवम्बर 2016 को हमने 1500-2000  मुम्बई के लोगों को साथ लेकर महानगरपालिका की मुख्य इमारत पर मोर्चा निकाला। 

फिर मुम्बई महानगरपालिका को निर्णय लेना पड़ा और उन्होंने पानी देने का धोरण बनाया। जिसमे लिखा था कलेक्टर की जमीन(मिठागर, वनविभाग,रेलवे,बी.पी.टी.फुटपाथ) पर रहने वाले लोगो को पानी के कनेक्शन के लिए उस जमीन प्रधिकरण की एन.ओ.सी लानी पड़ेगी और फिर एक बार नागरिकों को पानी देने से नकारा। फिर भी हमने पूरे मुम्बई में लोगो को अपने पानी के अधिकार के प्रति जागृत करना और उनका अधिकार देने की जिम्मेदारी ली। हम 2018 को बस्तियों में लोगोंको जगरूक करने जाते थे तो, पानी नही मिलने की वजह से लोग काफी निराश थे । 

लोगो को लगता था, हम वोटिंग के अवसर पर लोगो को झूठे आश्वासन देने के लिए आये है।लोग हम पे गुस्सा होते थे, हमे यहाँ नही आने का ऐसा कहते थे। कभी पानी माफिया धमकाते थे,पोलिस चौकी में कम्पलेंट करेंगे ऐसा कहते थे। काफ़ि समझाने पर जब लोगों को हमपर विश्वास हुवा तो लोगों ने फॉर्म भरने के लिए तैयार हुए।उसमे भी लोगों के डॉक्यूमेंट की वजह से काफी दिक्कत हुई लोग अपने डॉक्यूमेंट देने से डर ते थे, यह सब होते हुए हमने फ़ाइल बी.एम.सी में जमा किया ।

उसके बाद बी.एम.सी अधिकारी घर वेरिफिकेशन करने के लिए जल्दी नही आते थे बार बार बी.एम.सी. ऑफ़िस जाना पड़ता था । बोहोत ज्यादा समय होने के बाद ऑफिसर आते थे और जान बूझकर लोगो के डॉक्यूमेंट की गलतिया निकालते थे,और काम रुका कर रखते थे। काम जल्दी होने के लिए हमे जलअभियंता के साथ समस्या हल करने के लिए मीटिंग लेनी पड़ती। इतने कोशिशो के बाद आज भी रेलवेको पानी कनेक्शन नही मिला।

B) आपको इस अभियान में निरंतर सक्रिय रहने को क्या प्रेरणा देता है? या प्रेरणा कहाँसे मिलती है?

जहा इंसान यहाँ पानी अभियान पानी हक समिति से नागरिकों के पानी के अधिकार के लिए पूरे मुम्बई में चल रहा है।मैं खुद भी पानी से वंचित हु, पानी नही मिलने के कारण जीवन मे क्या कठिनाइयां आती है वो में समझती हूं। इसी वजह से में बाकी जो लोग है,जो मेरे जैसे ही पानी से वंचित है उनके परेशानियों को भी में समझ सकती हूं।यही कारण है कि, मुझे इस अभियान में पानी से वंचित लोंगो को न्याय देने के लिए लढने के लिए प्रेरित करता है। हम सब मिलकर मुम्बई कोर्ट में मुंबई महानगरपालिका के खिलाफ़ केस भी जीते है ये जीत मुझे प्रेरित करती है और मुझे विश्वास है कि पानी हक समिति मुम्बई के सभी लोगोंको न्याय देने में सक्षम है। इसी वजह से में पानी हक समिति के साथ इस अभियान में जुड़कर काम करूँगी।

अबरार सलमानी (अबरार भाई), भीम नगर, महाराष्ट्र नगर, मानखुर्द

1)     आप का पानी हक़ समिति से रिश्ता कैसे बना ?

        2011 से में पानी हक़ समिति से जुड़ा हूँ रत्न से मुझे पानी हक़ समिति के बारे में पता चला फिर हमने जो कैश जीत की पुरवा कब का है इससे नल कनेक्शन पे कोई फर्ज नही पड़ता फिर पानी हक़ समिति से मेरा और मेरी बस्ती के लोगो का पानी के लिए अर्जी भरी लीगल नल कनेक्शन के लिए जब से पानी हक़ समिति का मेरा रिश्ता बना।

2) आपने पानी हक़ समिति के काम मे क्या चुनौतियों का सामना किया है?

·       पहले हमने जो ऑफलाइन एप्लीकेशन किया था  फिर उसको दोबारा ऑनलाइन करना

·       MMRDA और BMC की मसला 

·       MLA और उसके लोगो का इल्जाम लगाना  और कहना कि आप पानी बेचने का धंधा करते हो ।

·       सबसे पहले पानी हक़ समीति से भीम नगर का फॉर्म भरा गया था मगर किसी ना किसी कारण से अभी तक यहाँ पानी नही आया।

3) आपको इस अभियान में निरंतर सक्रिय रहने को क्या प्रेरणा देता है? या प्रेरणा कहाँसे मिलती है?

पानी हक़ समिति लोगो के लिए लड़ रही है और जब तक उनको उनके हक का पानी नही मिलता तक लड़ेगी।पानी हक़ समिति हक़ पे काम करती है बड़े ईमान दरी से।

रत्ना माने, महाराष्ट्र नगर, मानखुर्द

1) आप का पानी हक़ समिति से रिश्ता कैसे बना ?

कोरो में काम करती थी जग से मुझे पानी हक़ समिति के बारे में पता चला.Water department को प्रिवेट करने की बात कर रहे थे तो पानी हक़ समिति की मीटिंग चलती थी कि नही करने देंगे ऐसा,पानी मूलभूत सुविधा में आता है और वो मेरा भी मुद्दा है  पानी हक़ समिति उसके ऊपर काम करती है जिकसी वजग से में पानी हक़ समिति से जुड़ गई।

2) आपने पानी हक़ समिति के काम मे क्या चुनौतियों का सामना किया है?

संघटन बनाने में बहोत दिक्कत आई क्योकि उनको पानी माफिया का डर था लीगल कनेंशन ही नही हौ पानी मिलेगा कैसे अगर हम इनके खिलाफ जाएंगे तो जिसकी वजह से साथ आने के लिए तैयार नही थे नगर सेवक(जिल्लो स्वामी) और MLA (अब असीम आज़मी)से दिक्कत आई कि वो बिले पानी का हम कर रहे है आप लोगो को भड़काओ मत।

3) आपको इस अभियान में निरंतर सक्रिय रहने को क्या प्रेरणा देता है? या प्रेरणा कहाँसे मिलती है?

पानी हक़ समिति के निर्माण होने के कारण हमें ये लगता ही नही की हम बाहर से जुड़े है ये हमारा अपना संघटन है इतनी मेहनत के बाद जब हमने कट ऑफ डेट हटाया है की पहले bmc बोलती थी कि 1995 के पहले वालो को पानी नही देंगे और हमने यह बदला है ।

शाकिर हुसेन शेख, चिखलवाडी,बैगनवाड़ी, गोवंडी

आप का पानी हक़ समिति से रिश्ता कैसे बना ?

पुकार NGO में काम करने वाले साथी सुनील से पानी हक़ समिति के बारे में पता चला। और पुकार में मैन और मेरे 4 दोस्तों ने मिलके एक रिसर्च किया था कि गोवंडी की बस्ती शांति नगर में पानी कम आने की वजह से के बच्चों की पढ़ाई और लोगी की सेहत पे क्या असर ही रह है मगर हमने सिर्फ जानकारी इखट्टा की और डॉक्यूमेंट्री बनाई दिक्कत को गहराई से जाना और पानी के मूल भूत अधिकार को समझा मगर पानी हक़ समिति में आने के बाद उम्मीद आई कि कैसे हम लीगल नल कनेक्शन ले सकते है और अब एक ही सोच है जहाँ इंसान वहाँ पानी।

2) आपने पानी हक़ समिति के काम मे क्या चुनौतियों का सामना किया है?

इंटरव्यू के बाद मेरा पहली चुनोती ये है कि मंडाला जैसी बस्ती जहा पानी का माफिया राज है और पॉलिटिक्स भी है और पानी का नेटवर्क भी नही है ऐसी जगह गली गली जाके अनजान लोगों को समझना जिसमे से कुछ लोग घर के बाहर आने को राजी नही उनको समझना कि पानी आपका हक है और उन्हें भरोसा दिलाना की हम और आप मिलके पानी का मूलभूत अधिकार लेकर रहेंगे।ऑनलाइन एप्लीकेशन की फ़ाइल पूरी करने के लिए मैप बनाना ।

BMC ऑफिसर की सही के लिए कभी कभी 2 से 3 दीन इंतेज़ार करना और उनको उनके काम का अहसास दिलाते हुए अपना काम कराना।लिखना मेरी सबसे बडी कमजिरी थी मगर अब कभी कभी में मीटिंग के मिनुट्स लिखता हूँ और रेगुलर डायरी भी।

3) आपको इस अभियान में निरंतर सक्रिय रहने को क्या प्रेरणा देता है? या प्रेरणा कहाँसे मिलती है?

वाटर पोलॉय जो पानी हक़ समिति ने बदली है और BPT जहा पिछले 9 सालों से सिर्फ NOC मिली थी वहाँ  पे पानी लाना और आरे में पानी लाना।

मुंबई के बिछड़े इलाके जहा BMC का वाटर नेरवर्क नही है वहाँ के लोगो का एप्लीकेशन करना और BMC को दबाव डाल के वहाँ नेटवर्क डालने का काम करना टाकी लोग अपने हक़ का पानी पी सके इसी वजह से पानी हक़ समिति से दिल लगी है।

शांती रवि हरिजन (शांति ताई), कौला बंदर, दारूखाना, रे रोड

आपका पानी हक़ समिति से रिश्ता कैसे बना?

मै मॅजिक बस मे  काम करती थी नितिन दादा  और मयूरेश जी के साथ  घर बचाओ घर बनाओ आंदोलन में जुड़ के फॉर्म भर के डेमोलेशन रुकया  ।उसके बाद में हम  आगे भी कुछ कर सकते है फिर मैं  सीताराम दादा से मिलकर पानी का मोर्चा  2- 3 बार निकाला । और मायने सोचा जब हम घर के लिए लाडे पानी के लिए भी लड़ूंगी । “इंटरनॅशनल वाटर डे “में हम मोर्चा लेके गए थे। 8 मार्च को मैजिक बस के साथ मिलकर मौर्चा लेके गए ।   फिर सिग्नेचर कैंपिंग किया “पानी पिलाओ अभियान ” 2014 में केस जीता । इस तरह पानी हक़ समिति से रिश्ता बना। 

२. आपने पानी हक़ समिति के काम मे क्या चुनौतियों का सामना किया है?

पानी हक़ समिति के साथ काम कर रही थी तब माफिया लोगो का धमकी सुना पड़ा । तू बड़ी आई पानी लाने वाली बड़े  बड़े नेता नही ले  आ पाए तो तू लाएगी ऐसा बोलते थे मुझे । जब मैं मोर्चे में लेके जाती थी तब  800 लोग होते थे  और मोर्चे में जाते जाते 150  लोग बचते थे ।राजनीतिक लोग धमकी देखे  रोक देते थे जाने से । लोगो को परेशान करते थे मैं  भी ज्यादा लोगो के ऊपर दबाव नही डालती थी। कि जो उनको पानी मिल रहा है वो भी बन्द करदेंगे । इस तरह के चुनौतियों का सामना करना पड़ा ।

३. आपको इस अभियान में निरंतर सक्रिय रहने को क्या प्रेरणा देता है? या प्रेरणा कहाँसे मिलती है?

यह अभियान में जुड़े रहने के लिए एक दूसरे का साथ ।और यह बस्ती में  पढ़े लिखे काम  है।  मैं इनके साथ क्यों जुड़े रही कि  काम से कम यह बस्ती के लिए  कुछ कर सकू और हम भी दुनिया के लिए और हमारे हक़ के लिए लड़ सकते है ऐसा  मुझे यह अभियान से सीखने मिला । मुझे यह  से प्रेरणा मिला। तो मैं भी संघर्ष के लिए  कर यह मारने  में उतर के लिए आई एक ही ज़िन्दगी है मैं कुछ कर के दिखाऊ। “ज़िंदाबाद”✊

सलीम अंसारी, कोकरी आगार -ट्रांजिट कैंप, वडाला

1) आपका पानी हक़ समिति से रिश्ता कैसे बना?

 पानी हक़ समिति बोहोत अच्छा काम कर रही है उनके कार्यकर्ता ईमानदारी से कम करती है लोगो को बोहोत जानकारी देते है और हम खुद ही बी. एम. सी  में जाकर सब प्रोसेस देखते है और हमको अच्छा लगा की यह समिति हमारा एक रुपया न खा कर हमारी इतनी सहायता करती है हमे भी अच्छा लगा की जब यह समिति हमारी सहायता कर रही है हम भी उनके साथ मिलकर काम करने लगे इस तरह हमारा रिश्ता बना पानी हक़ समिति से।

2) अपने पानी हक़ समिति के काम मे क्या चुनौतियों का सामना किया है ?

पानी हक़ समिति के काम से हमे बी. एम. सी का एक अलग अलग चेहरा देखने मिला जो रिस्वत नही देने के वजह से हमारा काम बोहोत धीरे धीरे किया बी. एम .सी वालो ने 15 दिन काम को 4 महीना लगा दिया और उसके वजह से हमे पानी का कनेक्शन बोहोत ज्यादा देरी से मिला । यह सब चुनौतियों का सामना करना पड़ा ।

3) आपको इस अभियान में निरंतर सक्रिय रहने को क्या प्रेरणा देता है ? या प्रेरणा कहा से मिलती है?

हमे पानी हक़ समिति अभियान से यह सीखने मिला जो हमारा हक़ है हमे मिलना है चाहिए और पानी हक़ जैसे समिति का पूरा साथ देना चाहिए अगर पानी हक़ समिति जैसे समिति जो खुद  चल कर हमारे पास आई है अगर हम अब इनकी सहायता करेंगें तो कब करेंगे । पानी हक़ समिति जिनके वजह से आज हमारे घरों में पानी का कनेक्शन बी. एम. सी ने  लगा कर दिया है शायद हम लोग नही कर सकते थे। क्योंकि हमें इसके बारे में कोई जानकारी थी ही नही हमारा जो पानी का हक़ है हमे कैसे और कब मिलेगा। यह हमें पानी हक़ समिति से जानकारी मिली । साथियो पानी हक़ समिति हमारा पूरी तरहा से सहायता कर रही है जो हमारा हक़ है वो दिला रही है। पानी हक़ समिति से यह प्ररेणा मिल रही है  हमे।

फातिमा मंडल, हे बंदर, दारूखाना, रे रोड

१. आपका पानी हक़ समिति से रिश्ता कैसे बना?

मैं मैजिक बस में काम करती हूं और मै मैजिक बस में काम करने जे वजह से जो  पानी हक़ समिति की मीटिंग होती है हमारे हर एक कामगार को वह मीटिंग में भेजते है जब हमलोग वह मीटिंग में जाते थे वह से हमलोग को जानकारी मिली की पानी हक़ समिति क्या काम करती है मीटिंग में  जाने से और वह जानकरी सुनने से और पानी हक़ समिति लोगो को उनका हक दिलाने के लिए काम करती है पानी के लिए वह जानकारी अच्छी लगने लगी और हमे लगा कि पानी हक़ समिति लोगो के लिए कुछ करेगी। इस तरह हमारा रिस्ता बन गया पानी हक़ समिति से।

२. आपने पानी हक़ समिति के काम मे क्या चुनौतियों का सामना किया है?

पानी हक़ समिति में  काम करने से बोहोत मुसीबतो का सामना करना पड़ा ।  हमे पानी हक़ समिति का हर 10 – 15 दिन में मीटिंग लेना पड़ता था और उनको जानकारों देना पड़ता था  और लोग जल्दी आते ही नही थे मीटिंग में और हमलोग  लोगो को जानकारी देते थे कि आपलोगो को फॉर्म भरना है पानी के लिए बी एम सी के पानी के लिए हम उनको बताते थे कि हमारा हर महीने में इलीगल पानी का कितना पैसा देना पड़ता है  पर कुछ लोग राहनीतिक लोगो से डरते थे कि हम इनकी बात सुनेंगे तो हमे जो पानी मिल रहा वो भी नही मिलेगा। इन कारणों के वजह से हमे बोहोत चुनौतियों का सामना करना पड़ता था । 

३. आपको इस अभियान में निरंतर सक्रिय रहने को क्या प्रेरणा देता है? या प्रेरणा कहाँसे मिलती है?

यह प्रेरणा हमे मैजिक बस और पानी हक़ समिति से मिलता है दोनों समिति हमारा पूरी सहायता करती है हमारी जो जगह है वह बी .पी .टी  की है कई  सालो से यह पानी नही है यह चोरी से पानी मिलता है हमे हफ्ते में 3 बार पानी मिला है और बोहोत पैसे देने पड़ते है और हमारे हक़ का पानी नही मिलता है बी .पी .टी में बोहोत संघर्ष किया। संघर्ष करने के बाद अबकी बार पानी हक़ समिति के मध्यम से पांच घरो ने एक नाल आया है बी. एम. सी से । कई संघर्षों के बाद हैम कामियाब हुए है। इस अभियान में जुड़ने से हमे बोहोत खुसी मिली है और पानी हक़ समिति के सहायता से आगे और कनेक्शन लगने वाले है यह हमें अस है । “ज़िंदाबाद” ✊ 

दत्तात्रेय पड्याळ, कोकरी आगार -ट्रांजिट कैंप, वडाला

१. आपका पानी हक़ समिति से रिश्ता कैसे बना?

पाणी हक्क समिती आमच्याकडे जेव्हा आली होती तेव्हा आम्हाला विश्वास नव्हता आम्हाला पाणी मिळेल त्यांनी टीएमसी मध्ये जाऊन काम केले आमचे ऑनलाईन फॉर्म भरून दिले त्यानंतर आमच्याकडे बीएमसीचे कर्मचारी येऊन तपासणी करून गेले ज्यावेळी बीएमसीचे काम करण्यासाठी पाण्यात समिती आणि आम्हाला भरपूर सपोर्ट केला बीएमसी मध्ये आम्हाला फ्री फॉर्म मिळण्यासाठी आणि हक्क समितीने पाण्यात भरपूर संघर्ष करण्यास लागले व प्रत्येक वेळी मिटींगला बीएमसी मध्ये आम्ही जात होतो आणि वरळीला चीनच्या मिटिंग मध्ये आम्ही प्रस्ताव टाकला होता नवीन पाईप लाईन जोडण्यास यावी यासाठी भरपूर संघर्ष करून आता ती जोडण्यात आली आहे आम्हाला सर्वांना पाणी हक्क समितीने पाणी दिले आहे ।

२. आपने पानी हक़ समिति के काम मे क्या चुनौतियों का सामना किया है? 

पाणी हक्क समितीबरोबर काम करत असताना बी एम सी कडून आम्हाला खूप त्रास झाला. कागदपत्रांच्या नावाखाली आम्हाला पाणी खात्याच्या अधिकाऱ्यांनी (पारधी यांनी) खूप तंगवले. लायसन्स प्लबरच पाहिजे, लायसन्स प्लबरलाच घेऊन या. गरज नसताना १५ दिवस फाईल दुसऱ्या खात्यात( परीक्षण खाते) पाठवली. जवळ पाईपलाईन असून ५०० मीटर दुरून कनेक्शन घेणास बळजबरी केली. पाणी हक्क समिती असल्यामुळे आम्ही कुणाला पैसे दिले नाही म्हणून सर्वच कामात बी एम सी अधिकाऱ्यांनी अडथळे आणले.  

३. आपको इस अभियान में निरंतर सक्रिय रहने को क्या प्रेरणा देता है? या प्रेरणा कहाँसे मिलती है?

पाणी हक्क समिती प्रक्रिया ट्रान्झिट कॅम्प वडाळा येथे आले असता माझे नाव दत्तात्रय पड्याळ पाणी हक्क समिती मधील सदस्य प्रवीण बोरकर मला भेटले असता आम्ही पाणी हक्क समिती मधून काम करत आहोत तुमच्या पाण्याच्या संदर्भात काय प्रश्न असतील तर आमच्या पाण्यात समिती मधून काम करावे व तुम्हाला पाणी देण्यास आम्ही बीएमसी मधून पाणी देण्यास देण्यास आम्ही सहकार्य करू बीएमसी मधील काही अडचणी असल्यास आम्ही पाणी हक्क समिती दूर केले आहे .

पाणी आपल्या समितीतील अध्यक्ष श्री सिताराम दादा यांनी हायड्रोलिक इंजिनियर वॉटर डिपारमेंट यांच्यासोबत मीटिंग लावली असता कोकरी ट्रान्झिस्ट कॅम्प वडाळा  मध्ये पाण्यासंदर्भात प्रश्न विचारले असता तेथील रहिवाशांना पाणी मिळत नाही पाणी हक्क समितीने आम्हाला पाणी मिळवून दिले सर्व परिवारांना    आनंदी आहेत पाण्यात समिती बरोबर काम करत असताना आम्हाला नवीन नवीन अनुभव आले पाने क समिती घरच्यासारखा कुटुंब झाला आहे ।

मोःउमर शेख (उमर भाई)

A) आपका पानी हक़ समिति से रिश्ता कैसे बना?

हमारे बस्ती में 2004 में डेमोलिशन हो गया था तो हम उस वक्त से हाउसिंग के मुद्दे पे काम कर रहे थे। फिर बाद मे पुरे मुम्बई के लोगों की एक सोच बनी की, पानी भी हमारी बस्ती की महत्वपूर्ण समस्या है इसके लिए भी हमें लड़ना चाहिए। जो हमारे हाउसिंग के मुद्दे पर काम करने वाले पढ़े लिखे साथी सीताराम दादा, जगदीश पाटणकरजी ने हमें मार्गदर्शन किया और पानी हक़ समिति का जन्म हुवा। उसके बाद हमने 2012 में पानी के अधिकार के लिए मुंबई महानगर पालिका के  खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखल की और 2016 मैं  हम जित गए लोगों की जीत हुई कोर्ट ने मुंबई महानगरपालिका को पानी देने का आदेश दिया। इस तरह से पानी के इस  संघर्ष के साथ साथ ही हमारा पानी हक़ समिति से रिश्ता बना।

B)आपने पानी हक़ समिति के काम मे क्या चुनौतियों का सामना किया है?

1)हम जब  बी.एम.सी में पानी कंनेक्शन करने के लिए जाते तो उन्होंने हमें 1995 के बाद के लोगों पानी नहीं मिलेगा ये कहकर नकारा।

2)जब पानी हक़ समिति ने 2012 में सबको पानी मिलना चाहिए इसीलिए  सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की। और 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई महानगरपालिका को सबको समानता पूर्वक पानी देने का आदेश दिया। यह सुनावनी पानी हक़ समिति की वजह से हुयी पर बस्ती के नगर सेवक,आमदार लोगों को झूट बोल रहे थे की यह काम उन्होंने किया है। तब मैंने उनसे पूछा की आपने यह काम किया है, इस का कुछ दस्तावेज है आपके पास? उसके बाद मुझे उनके लोगों से मारने की धमकियां दी गई डराया भी  गया।

3)जब हम लोगों को पानी कंनेक्शन के लिए फॉर्म भरने के लिए जागृत करते थे। तो पानी माफिया उनका धंदा बंद न हो इसीलिए मुझसे झगड़ा करते थे।

4)जब हमने 2017 में ऑफलाइन फॉर्म भरे तो बी.एम.सी ने कहा कि बोहोत सारे फॉर्म भरे है हमारे पास उतने स्टाफ नहीं है, इसीलिए फॉर्म वापस भरके ऑनलाइन करो।

5)2018 में पूरे मुम्बई में ऑनलाइन फॉर्म भरने का शुरू किये।उस टाइम भी बस्ती के लोग हमें गुस्सा होकर बात करते थे , फॉर्म भरने के लिए तैयार नहीं होते थे क्योंकि पहले ही उनसे ऑफलाइन फॉर्म भरके लिए थे। लोगों को अब विश्वास नहीं होता था पर उनका विश्वास जितने में बोहोत कठिनाइयां आती थी। 

C)आपको इस अभियान में निरंतर सक्रिय रहने को क्या प्रेरणा देता है? या प्रेरणा कहाँसे मिलती है?

हमें पानी हक़ समिति के साथ काम करने में बहुत ख़ुशी मिली। जितने भी लोग पानी से वंचित है, उनमे से काफी सारे लोगों को उनका पानी का अधिकार मिला। पानी हक़ समिति के साथ पानी के इस संघर्ष में हम कार्यरत थे, उसमे हम सब लोग सफल हुए। इंसानियत के नाते पानी देना यह एक पुण्य का काम है, वही काम पानी हक़ समिति से जुड़कर हम कर रहे है। आगे भी बाकि लोगों को भी उनका पानी का अधिकार मिलाना है, इसके लिए हमें जुड़कर काम करना है,और भी बाकि सारे मुलभुत अधिकारों के मुद्दे पर भी पानी हक़ समिति के साथ हम कार्यरत रहेंगे। पानी हक़ समिति लोगों के अधिकारों के लिए लड़ती है और इससे ही मुझे प्रेरणा मिलती है,और में हमेशा पानी हक़ समिति के साथ जुड़कर काम करूँगा। 

जय मती, सिद्धार्थ नगर, अँधेरी (प )

1) आपका पानी हक समिति से रिश्ता कैसे बना?

जब हम अपने बस्ती को बचाने के लिये नगर सेवक,विधायक, सांसद से मिल रहे थे,लेकिन वो फिर हमें दिलाशा देते थे कि आपका काम होगा लेकिन कुछ होता नही था,उनका कहना थाकि 1995 और 2000 काpoofलेकेआओऔरहमारेपासयहदोनोंभीनहीथे,हमाराविस्वासराजनेताओंकेऊपरसेउठरहाथा,इसदौरानहमारीमुलाकातपानीहकसमितिकेसाथहुईहमलोगोनेमिलकेकामसुरुकियापानीकेऊपरपानीहकसमितिनेहमेबतायाकिहमाराअधिकारक्याहै,हमकैसेलड़केअपनाअधिकारपासकतेहै,हमेबहुतखुशीहुईकिकोईहमारेलियेखड़ाहुआहै,हमारापानीहकसमितिसेरिश्तासाहोगया।

2)आप ने पानी हकसमितिकेकाममेक्याचुनोतियोंकासामनाकियाहै?

हम जबBMCकेपासगएपानीलेनेकेलियेतोउनकाकहनाथाकिआपकानूनकेदायरेमेंनहीआतेआपकोपानीनहीमिलेगा,CollectorकीNOCलगेगी,आपलोगोकोDocumentबराबरनहीहै,औरBMCमेंजानेकेबादOfficerहमेsupportनहीकरतेथे,कल,आओ,परसोआओएशेचलताथा,राजनेताभीभीसिर्फहमेयूज़करतेथेVotingकेसमयकहतेथेसबकरकेदेनगेलेकिनवोटिंगकेबादसबभूलजातेहै,बस्तीमेंलोगोकोविस्वासदिलानाकीहमेभीपानीमिलेगाथोडाओरइंतजारकरलोकामहोरहाहै।

3)आपकोइसअभियानमेंनिरंतरसक्रियारहनेकोक्याप्रेरणादेताहै? याप्रेरणाकहासेमिलतीहै?

हमेइसअभियानकेनिरंतरसक्रियारहनेकेलियेसंविधानमेंलिखाहमाराआधिकारहमेप्रेरणादेताहै,कीहमसहीराहपरहै, औरवक़्तलगेगातोचलेगालेकिनहमअपनाआधिकारलेकेरहेंगेऔरदूसरोंकाभीअधिकारदिलानेकीपूरीकोशिसकरेंगे. 

सुनील यादव, गोकुलधाम, गोरेगांव

आपका पानी हक समिति से रिश्ता कैसे बना?

    पानी हक समिति से मेरी पहली मुलाकात  इंटरव्यू  के दौरान हुई थी | हमारा सिलेक्शन होने के बाद पता चला कि पानी हक समिति क्या है और लोगो के पानी के अधिकार के बारे लड़ती है,और जानकारी दे के लोगो की मदत भी करती है | हमे बहुत अच्छा लगा हम भी इन के साथ जुड़ गये इस तरह से पानी हक़ समिति और हमारा रिश्ता बना।

2)आपने पानी हक समिति के काम मे क्या चुनोतियों का सामान किया है?

 हमारे लिये पहले तो सब से बड़ी चुनोती थी कि, हम लोगो को पानी कन्नेक्शन कैसे करके देंगे | क्युकी 20-25 साल से जिसे आज तक की सरकारी सुविधा नही मिली थी वह हमारी बात क्यों  मानेंगें | दूसरी तरफ बीएमसी के अधिकारी जानबूझकर बहोत ज्यादा समय लगा रहे थे पानी कनेक्शन की प्रोसेस करने में और उसी वक्त  बस्ती के अलग अलग कार्यकर्त्ता  यह सब  काम  हमें  नही करने देते थे | इस तरह की  चुनोतियों का सामना हमे करना पड़ता है।

3)आपको इस अभियान में निरंतर सक्रिय रहने को क्या प्रेरणा देता है? या प्रेरणा कहा से मिलती है?

  हमे लोगो से बात कर के जब पता चला कि आजादी के 70 साल बाद भी आज लोगो को मुम्बई जेसे शहर  में पीने के लिए अधिकृत पानी  नहीं मिलता| आजतक मुंबई में जो लोग पानी अधिकार से वंचित थे पानी हक़ समिती के ‘जहां इन्सान वहा पानी अभियान’ के वजह  आज बहोत सारे बस्तियोंमे लोगो को अधिकृत पानी का अधिकार मिलाया  | हमारी कामयाबी  ही हमें प्रेरणा देती है की, पानी हक़ समिती के साथ जुड़कर हमें बाकि सभी पानी से  वंचित नागरिकों के लिये पानी अधिकार हासिल करना  है |

Since we started our work back in 2007 as Mumbai Paani, we have been written about by various news outlets. Our protests, marches, court victory, and other activities have been regularly published in print and online portals across languages.